January 19, 2018

EFT Kya hai, Electronic Fund Transfer in Hindi

Electronic Fund Transfer (EFT) अपने आप में EFT को Define करता है, अपने नाम के अनुसार ही इसमें Funds को यानि Money को हम Electronic way में Transfer कर सकते है।

EFT in Daily Life, आज के समय में अगर आपने खरीदी गई, कोई सामान का बिल अपने ATM या फिर Phone से Pay किया हो या अपना मोबाइल Recharge किया हो, तो आप जानकर हैरान होंगे कि इसके पीछे जो Technology काम करतीं है, वो "EFT" ही होता है

EFT क्या होता है.? EFT Hindi me:

Electronic Fund Transfer (EFT) एक Electronic Payment System है जिसके द्वारा कोई भी User किसी भी बैंक की Branch(शाखा) से Same Branch या किसी भी अन्य बैंक में किसी व्यक्ति, Company या किसी Corporate के खाते में Fund Transfer कर सकता हैं, वो भी बिना किसी Paper को use किए।

Kya Hai Electronic fund transfer, EFT in Hindi


Electronic Fund Transfer (EFT)  के द्वारा होने वाले सारे Transactions को Generally, Electronic Banking के नाम से जाना जाता है और EFT के Through किए गए Direct Deposit को e-Check यानि  Electronic Check कहा जाता है। NEFT और RTGS एक प्रकार के EFT ही है।

Types Of Electronic Fund Transfer (EFT):

अगर हम Types of EFT की बात करे तो Funds Transfer करने के बहुत से Electronic ways मौजूद हैं, पर मैं यहाँ पर आपको Daily Life में use होने वाले Important EFT के types के बारे में बतायुंगा जो निम्नलिखित है:-

  1. Direct Deposit: आज के समय में किसी भी Industry में अपने Client, Partners या फिर अपने किसी भी Employee को बिना Bank जाए Direct Deposit Method का use कर Payment कर दिया जाता है। 
  2. Wire Transfers:  आप अगर विदेश में पैसा भेजना या वहाँ से पैसे मांगना चाह्ते है, तो आप Wire Transfer का use करते है। इस Transfer method के through आप बहुत बड़ी रकम को आसानी से और fast Process कर सकते है। 
  3. ATMs:  ATM जिसे Plastic Money भी कहा जाता है का use आप बिना Bank जाए, अपने Paise को अपने मर्ज़ी से निकाल सकते है, किसी को Payment कर सकते है और आप ATM का use पैसे भेजने में भी कर सकते है।   
  4. Debit / Credit Cards:  किसी भी Financial Transaction को करने में help करता है। इसका use आप अपने Account से किसी को Bill Pay करने में और Online Shopping के समय करते है।    
  5. Personal Banking: इसके Through आप अपने कंप्यूटर या Laptop में अपने Acccount की सारी जानकारी और पैसे भेजने के लिए करते है आप इसका इस्तेमाल भी अन्य सभी EFT Transaction को पूरा करने में भी कर सकते है।
  6.  Pay-by-Phone: आज के Digital World में अधिकतर लोगों के पास एक Technology उनके साथ होती है और वह हमारा छोटा सा Phone हैं। जो एक चलता फिरता बैंक है। आपको बहुत सारे Financial Apps के बारे में जानकारी होगी जैसे SBI Quick Pay, Mobikwik, BHIM, e.t.c. का use पैसे से जुड़े Transaction के लिए हम करते है। 
  7. Electronic Checks: ये Paper Check की तरह ही काम करता है, लेकिन Electronic format में होता है। अगर आपको किसी को पैसे pay करना है तो आप Payment लेने वाले का Account Number, Bank का Routing number और Security Code (digital signature) की जरुरत होती है।
इसे भी जानें: Network Topology Kya Hai

EFT Use करने का Advantage और Disadvantages:

Advantages of EFT in Hindi

  • Time savings
  • Expenses control
  • Reduced risk of loss and theft
  • User-friendly
  • Convenience

Disadvantages of EFT in Hindi

  • Restrictions in Tran
  • The risk of being hacked
  • lack of anonymity
  • The necessity of Internet access
EFT क्या होता है.? Types of Electronic Fund Transfer in Hindi, इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रान्सफर से लाभ और हानि  इसे अपने friends के साथ जरुर Share जरुर करें। 

December 24, 2017

What is Web Browser in Hindi [Web Browser Kya hai.?]

Web Browser Kya Hota hai, World Wide Web के लिए Window की तरह काम करता है। जब भी हम Internet पर Surfing की बात करते हैं तो पहला Internet Connection और दूसरा Requirement एक Browser होता है।

आज हम जानेंगे कि आख़िर Internet Browser क्या है और ये कैसे काम करता है।

What is Web Browser In Hindi:

Internet Browser आपके Mobile और आपके Desktop में Installed एक Software Program है। जिसकी Help से आप किसी Web Page को Internet पर आप आसनी से locate कर उसे Access कर सकते हैं।

Browser मुख्य रूप से Internet पर Available Websites को Display करने और Access करने के लिए उपयोग किया जाता है। Browser, Hypertext Transfer Protocol (HTTP) का Use कर किसी Website और webpage को किसी Human Language में translate करने का काम करते हैं।

Web Browser Kya Hai, What is browser and how it works in hindi

Web Browser हमें अन्य Protocol जैसे: Secure HTTP (HTTPS), File Transfer Protocol (FTP), Email और pdf files को Display करने में भी Help करता है। इसके अलावा, आप Browser का इस्तेमाल कर किसी Webpage पर Available video, audio और Flash content को भी देख सकते हैं।

In Short आप कह सकते है कि:-
"Browser हमें किसी भी Network पर उपलब्ध website और Information तक पहुंचने में Help करता है।"

History Of Web Browser in Hindi:

Sir Tim Berners Lee ने 1990 में सबसे पहले Web server और Web Browser को Develop किया था। इस Browser को World Wide Web नाम दिया गया और उसके बाद इसका नाम बदल कर Nexus कर दिया गया था। फिर साल 1993 में Mosaic नाम से एक Browser Launch हुआ जिसे Marc Andersen ने बनाया था।

इसके बाद 1995 में जब Microsoft ने अपना Operating System Launch किया तो उसके साथ Internet Explorer के नाम से Microsoft ने अपना Internet Browser भी Launch कर दिया।

साल 2002 तक Internet Browsing Market के 95% हिस्से पर Explorer का राज रहा और इसकी सबसे बड़ी वजह, इसका Microsoft Windows OS के साथ In build होना था।

इसके बाद Otello Corporation ने अपना Internet Browser, Opera को Launch किया। फिर 1998 में एक और Internet Browser Mozilla FireFox आया जो एक Open source आधारित web browser है।

Web Browser के field में सबसे बड़ा Change तब आया जब Search Engine Company, Google ने अपना Internet Web Browser Chrome September 2008 में Launch किया। इसके बाद पुरे Internet पर Google ने बहुत ही तेजी से 58%  Market पर कब्ज़ा कर लिया और Google Chrome लोगो के लिए पहली पसंद बन गया।

Web Browser Kaise Kam Karta Hai:

Web Browser कैसे काम करता है.? अगर हम कहे कि Internet और Web Browser एक दुसरे से जुड़े हुए हैं तो ये गलत नहीं होगा क्यूंकि बिना Internet के हम Browser का इस्तेमाल नहीं कर सकते और Browser बिना Internet के कुछ भी नहीं है।

जब हम किसी Browser में कुछ Type कर Search करते है। तब Browser उस Search Request को Internet पर Available सभी Special Computer जिसे Domain Name Server (DNS) के रूप में जाना जाता है, की Accessible Public file से Information को हमारे लिए खोज कर लाता हैं। ये सभी Request बहुत सारे Router और Switches के through पूरा होता है। जब आप किसी Web page को देखना चाहते हैं, तब आप अपने Browser में दिए गए Address Bar और Search bar का Use कर उस Page के लिए request करते है। Browser उसे आपके लिए खोज कर लाता हैं।


Web browser के इस्तेमाल से हम World Wide Web को आसानी से access कर पाते हैं। Web Pages को देखने के लिए Protocol का Use होता हैं। जैसे किसी भी Language के लिए एक विशेष तरीका का होना। Protocol भी एक प्रकार Set of Rules होता है, जैसे हमें English बोलने और लिखने के लिए कुछ Rules को जानना होता हैं। ठीक उसी तरह से Browser को भी हमारी बात समझने के लिए एक Specific Language की जरुरत होती है। इस Set of Rules को हम HTTP यानि Hyper Text Transfer Protocol कहते है।


HTTP Web server को ये बताता है कि किसी Web page के contents को किस format में Transmit करना है।  साथ ही की किसी users के द्वारा दिए गए commands के लिए web servers और web browsers दोनों को कैसे react करना है। HTTP, किसी भी Web Client और Web Server को एक दुसरे से जुड़ने में help करता है।

जब भी कोई User किसी भी browser के Address bar पर कोई भी URL Address को type करता है, तब browser उसकी उस Request को HTTP command के रूप में Web Server को भेजता है। इसके बाद browser उस web server के साथ जुड़ता है, और वहां से Request किये हुए Web page या Website के उस Content को निकाल कर User के Web Browser में सारी जानकारी Show करता है।

अगर आपको "What is Web Browser and How its Works in Hindi" इस जानकारी में कुछ ग़लत या इस Subject से जुडी कोई भी सवाल हैं, तो आप हमसे हमारे Comment box में पूछ सकते हैं।

July 30, 2017

What is COCOMO in Hindi, Software Engineering me [COCOMO Model Kya hai.?]

Software Engineering me COCOMO Model Kya Hai:


Barry Boehm ने वर्ष 1981 में COCOMO (Constructive Cost Estimation Model) Model को Introduce किया था। Bohem के अनुसार कि किसी भी Software Development Project को उसके Development के Complexity के आधार पर Organic, Semidetached और Embedded में से किसी एक में classified किया जा सकता है।

COCOMO Model in Hindi:

COCOMO Model का उपयोग किसी भी Software के Development में Cost Estimation के लिए किया जाता है जो Software के Cost को Evalute करता है। Boehm के अनुसार किसी भी Project के Development के लिए लगने वाला Cost उस Software के(बनने वाला) Characteristics के साथ साथ उसमे लगने वाले Development Team और Development environment के ऊपर भी निर्भर करता है, और ये सभी Factors किसी न किसी रूप में उसके Cost को effect करते है।

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COCOMO Model में किसी Project को Devlope करने के लिए उसमे लगने वाले समय(month) और Person की संख्या की जरूरत को estimate करने के लिए effort equation का प्रयोग किया जाता है। Effort estimation के unit के लिए PM(person-months) का use होता है। यहाँ पर PM किसी Project को बनाने में किसी एक Person द्वारा एक महीने (months) में उसके Workdone से है।



Boehm के अनुसार, किसी भी Software को Cost Estimation के आधार पर निम्न तीन Stages में बांटा जाता हैं, या बांटा जाना चाहिए।
  1. Basic COCOMO Model,
  2. Intermediate COCOMO Model, and
  3. Complete COCOMO Model
हम जल्द ही COCOMO Model के तीनो Stages को details में Discuss करेंगे..। 

January 2, 2017

Software Engineering Kya hai [What is Software Engineering in Hindi]

Software Engineering एक Systematic रूप है जिसके द्वारा किसी Electronic (Devices) Technology के लिए विशेष प्रकार के Application के  Design, Development, Implementation, Testing और Maintenance से हैं ।

"Software engineering" शब्द सर्वप्रथम 1968  में NATO के Software Engineering सम्मेलन में प्रयोग में लाया गया था जोकि उस समय के "Software crisis" को सुलझाने के लिए आयोजित किया गया था और तबसे अबतक ये Software engineering एक ऐसे व्यवसाय के रूप में विकसित हो चुका है जो High Quality के Software विकसित करने के लिए समर्पित है जो सस्ते, सरलता से रखरखाव करने के योग्य और तेज़ी से बनाये जा सकने में आसन हो।

Software Engineering क्या है.?


अन्य Engineering शाखाओं की तुलना में "Software Engineering" एक नया क्षेत्र है, इसलिए इस क्षेत्र में बहुत काम किया जाना अभी बाकी है और तो Software Engineering को लेकर बहुत वाद-विवाद है की वास्तव में ये क्या है और इस बात की भी की क्या ये Engineering के क्षेत्र में रखे जाने योग्य है भी या नहीं।

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Software Engineering के क्षेत्र में तीव्रता से वृद्धि हुई, इसे अब केवल Programming तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता हैं। Software Engineer Programming तथा Designing करके इन Software's तथा Application's का निर्माण करते है।

                                             "Software engineering" के स्थान पर Software Industries में "Software Development" शब्द का भी प्रयोग किया जाता है जो engineering शब्द को Software Development के लिए संकुचित मानते हैं।

In Short हम कह सकते है कि :
" Software Engineering का अर्थ एक ऐसी Engineering से है जिसमें Computer System तथा किसी अन्य Electronic Devices के लिए Software के निर्माण और उसके विकास पर शोध से किया जाता है।"

Software को  अलग-अलग आधार पर अलग-अलग तरीकों से जांचा जाता हैं। उदाहरण के लिए, कोई भी User जब भी किसी Software को Use करता है तो अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रदर्शित होते या Perform करते देखना चाहता हैं। ठीक उसी तरह, किसी भी Software के Design, Coding और रखरखाव में शामिल Developers, User को Software वितरित (Deliver ) करने से पहले Software की आंतरिक विशेषताओं और खामियों को देखकर Software का मूल्यांकन करते हैं।




Software के Characteristics:

Software Characteristics को छह प्रमुख घटकों में वर्गीकृत किया जाता है।

एक अच्छे Software के निम्नलिखित गुणधर्म होते है:-

01). Functionality:  किसी भी सॉफ्टवेयर के निष्पादन की डिग्री को अपने इच्छित उद्देश्य से संदर्भित करता है।

02). Reliability:  किसी दी गई स्थितियों के तहत वांछित कार्यक्षमता को प्रदान करने के लिए सॉफ्टवेयर की क्षमता का उल्लेख करता है।

03). Usability: इस बात को संदर्भित करता है कि सॉफ्टवेयर आसानी से कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

04). Efficiency: सबसे प्रभावी और कुशल तरीके से सिस्टम संसाधनों का उपयोग करने के लिए सॉफ्टवेयर की क्षमता को दर्शाता है।

05). Maintainability: किसी सॉफ्टवेर को आसानी से अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने, इसके प्रदर्शन को बेहतर बनाने, या Error को सुधारने के लिए उसके Software System में संशोधन किया जा सकता है।

06). Portability: Software developers आसानी से (या कम से कम) परिवर्तनों के बिना, एक Platform से दूसरे Platform में Software Transfer कर सकते हैं, दुसरे शब्दों में, यह सॉफ्टवेयर की क्षमता को अलग-अलग Hardware और Software Platforms पर आसानी से कार्य करने के लिए संदर्भित करता है, इसमें कोई भी बदलाव किए बिना या आंशिक।

उपरोक्त विशेषताओं के अलावा, Robustness, Platform independecy और Integrity भी महत्वपूर्ण हैं।
Robustness: जिसमें Software Invalid Data के साथ Deliver किए जाने के बावजूद कार्यशीलता रख सकता है, जबकि Integrity: वह है जिसके द्वारा किसी सॉफ्टवेयर या डेटा को अनधिकृत पहुंच से रोका जा सकता है।

February 24, 2016

Bus Topology क्या हैं ..?(What is Bus Topology Network)

Bus Topology में एक ही Cable का प्रयोग होता है और सभी Computer's को एक ही Cable से एक ही क्रम में जोड़ा जाता है।  Bus Topology, LAN का एक arrangement होता है जिसमे की every node एक main cable और link से connected होती है जिसको की बस कहा जाता है इसमें कोई भी Device दुसरे Device से Data प्राप्त करना चाहता है तो उसे देखना पड़ेगा की Network खाली है या नहीं Network खाली होने पर ही Data प्राप्त किया जा सकता है।

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Bus Topology में Cable के Start तथा End में एक विशेष प्रकार का Device लगा होता है जिसे टर्मिनेटर (Terminator) कहते है।  इसका कार्य Signals को Control करना होता है।

Bus Topology के लाभ (Advantages of Bus Topology) :


  • Bus Topology को Install करना आसान होता है। 
  • इसमें Star व Tree Topology की तुलना में कम Cable Use होता है। 

Bus Topology के नुकसान (Disadvantages of Bus Topology) :


  • किसी एक Computer की खराबी से Data Transfer रुक जाता है। 
  • बाद में किसी Computer को जोड़ना अपेक्षाकृत कठिन है। 
  • इस Topology में किसी Individual device issues को troubleshoot करना मुश्किल होता है। 
  • ये किसी बड़े Network के लिए Suitable नही होता हैं।  

February 9, 2016

Star Topology क्या हैं ..?(What is Star Topology Network)

Star Network Topology सबसे ज्यादा Use होने वाला Common Computer Network Topology है।  ये एक Local Area Network (LAN) होता है, जिसमे सारी Nodes Directly एक Common Central Computer, Hub or Switch से जुड़ा होता  है | Network की हर Node Indirectly एक दूसरे से जुड़ी होती है।

यह दिखने में Star की तरह होता है इस लिए इसे Star कहा जाता है इस Network में एक Host Computer होता है जिसे सीधे अलग अलग Computer से जोड़ दिया जाता है।  Local Computer आपस में एक-दुसरे से नही जुड़े होते हैं इनको आपस में Host Computer द्वारा जोड़ा जाता है।  Host Computer ही पूरे Network को Control करने काम करता है।

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Star Topology के लाभ (Advantages of Star Topology):

Star Topology के विभिन्न लाभ इस प्रकार से हैं:-
  • Star Topology में  एक Computer से Host Computer को जोड़ने में Cable Cost कम आता  है।
  • Star Topology में यदि  Local Computer की संख्या बढाई जाती हैं, तो भी  एक Computer से दुसरे Computer पर सूचनाओ के आदान-प्रदान की गति प्रभावित नही होती है, लेकिन इसके कार्य करने की गति कम हो जाती है क्योकि दो Computer के बीच केवल Host Computer ही होता है।
  • Star Topology में यदि कोई Local Computer ख़राब भी हो जाता है तो शेष Network इससे प्रभावित नही होता है।

Star Topology से हानि (Disadvantages of Star Topology:

Star Topology के विभिन्न नुकसान इस प्रकार से हैं:
  • Star Topology में  पूरा System Host Computer पर निर्भर करता  है।
  • Star Topology में  यदि Host Computer ख़राब हो जाय तो पूरा का पूरा Network Damege या Fail हो जाता हैं। 

January 29, 2016

Analog और Digital Communication क्या होता हैं..?

ये हम सभी जानते है कि सूचना का आदान प्रदान एक मुलभुत किय्रा है Communication से मतलब किसी Information और messege को बोधगम्य(Conceivable) रूप में एक स्थान से दुसरे स्थान तक Transfer(स्थानांतरण) करना।

Information का आदान प्रदान Graphical Symbols जैसे हांथों ,आँखों और इशारो से किया जा सकता है या तो ध्वनि संकेतों जैसे ढोल बजाकर किया जा सकता है। आधुनिक युग में अधिक दुरी पर Information को send करने के लिए Electrical Signal का उपयोग होता है। इस प्रक्रिया में पहेले सूचना को electrical संकेतो में Convert किया जाता है फिर उसे भेजा जाता है।

 Electronic Circuit दो प्रकार के होते है :
  • Analog Circuit 
  • Digital Circuit
Analog Communication में प्रयुक्त Circuit Analog Circuit कहलाते है और इनमे Analog Signal Use होते है, जो Continuous होते है।,

Digital Communication में प्रयुक्त Circuit Digital Circuit कहलाते है और इनमे Digital Signal Use होते है, जो Discrete( विविक्त ) होते हैं।

analog-and-digital


Analog Signal:  ये वे होते है जिनमे वोल्टेज  अथवा विधुत धारा का मान समय के साथ निरंतर बदलता जाता है।  Analog Signal के लिए Decimal Number System प्रयुक्त होता है।


Digital Signal: ये वे होते है जिनमे वोल्टेज अथवा विधुत धारा के केवल दो स्तर होते है। Digital Signal के लिए Binary Number System प्रयुक्त होता है जिसमें signal के दो स्तर 0 और 1 होते है Bits कहलाते है।वास्तव में संसार की अधिकाँश राशियाँ Analog है किन्तु फिर भी अधिकाँश इन Analog राशियों को Digital form में Convert करके Digital Signal's की Processing की जाती है

January 24, 2016

Ring Topology क्या हैं ..?(What is Ring Topology Network)

Ring Topology Network में कोई होस्ट, मुख्य या कंट्रोलिंग कम्प्यूटर नही होता।  इसमें सभी कम्प्यूटर एक गोलाकार आकृति में लगे होते है प्रत्येक कम्प्यूटर अपने अधीनस्थ (Subordinate) कम्प्यूटर से जुड़े होते है, किन्तु इसमें कोई भी कम्प्यूटर स्वामी नही होता है। इसे सर्कुलर (Circular) भी कहा जाता है

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रिंग नेटवर्क (Ring Topology Network) में साधारण गति से डाटा का आदान-प्रदान होता है तथा एक कम्प्यूटर से किसी दुसरे कम्प्यूटर को डाटा (Data) प्राप्त करने पर उसके मध्य के अन्य कंप्यूटरो को यह निर्धारित करना होता है कि उक्त डाटा उनके लिए है या नही।  यदि यह डाटा उसके लिए नही है तो उस डाटा को अन्य कम्प्यूटर में आगे (Pass) कर दिया जाता है।


Ring Topology के लाभ (Advantages) –


यह नेटवर्क अधिक कुशलता से कार्य करता है, क्योकि इसमें कोई होस्ट (Host) यह कंट्रोलिंग कम्प्यूटर (Controlling Computer) नही होता। यह स्टार से अधिक विश्वसनीय है, क्योकि यह किसी एक कम्प्यूटर पर निर्भर नही होता है। इस नेटवर्क की यदि एक लाइन या कम्प्यूटर कार्य करना बंद कर दे तो दुसरी दिशा की लाइन के द्वारा काम किया जा सकता है।



Ring Topology के हानि (Disadvantages) –


इसकी गति नेटवर्क में लगे कम्प्यूटरो पर निर्भर करती है। यदि कम्प्यूटर कम है तो गति अधिक होती है और यदि कंप्यूटरो की संख्या अधिक है तो गति कम होती है। यह स्टार नेटवर्क की तुलना में कम प्रचलित है, क्योकि इस नेटवर्क पर कार्य करने के लिए अत्यंत जटिल साफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।

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