BytizeNotes Hindi - Computer Technology ki Duniya ka Tech Guru

July 14, 2019

The OSI Model in Hindi (What is OSI Reference Model in Hindi)

OSI Model को ISO OSI MODEL भी कहा जाता है क्यूंकि ISO (International Organization for Standardization) ने 1984 में Develope किया था। ये एक Reference Model है, OSI model ये Ensure करता है की पुरे World मे Data Communication के लिए एक ही Model या Standard को Use किया जाये जो की आपस मे Communication के लिए Compatible हो।

OSI Model का Main Concept Network मे दो Endpoint के बीच Complete Communication Process के लिए Conman Standard को follow करना और  Data Transmission करना ।

OSI Reference Model In Hindi:


OSI Model को अगर Define किया जाये तो कहा जा सकता है की OSI Model Networking Process मे किसी भी तरह का कोई Functions Perform नहीं करता है क्योकि यह एक Conceptual Network Architecture है, OSI Model को layered model भी कहते है जो की ये Describes करता है की एक Network Computer पर Run होने वाले Application Program से दूसरे Network Computer पर Run करने वाली Application Program तक Information कैसे Move होती है।

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The OSI Seven Layers Models:


OSI  Model 7 layers से मिलकर बना होता है। ये सभी layers Data के साथ कुछ ना कुछ Processing करती है, और जब Data दूसरी तरफ उसी layer में पहुँचता है तो ये Data Processing से हट जाती है। हर layer पर data को अलग अलग नामों से जाना जाता है। ये layers दोनों तरफ होती है Sender(Data भेजने वाला) की तरफ भी और Receiver(लेने वाला) की तरफ भी। ये सभी Layers Descending Order में होती है यानि आखिरी layer सबसे पहेले ऊपर और पहली layer सबसे निचे आती है।

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Seven Layer's(OSI) Protocol hindi me:

OSI Model में निम्न सात (7) परत होती हैं :
(The OSI Model has seven layers)


01). The Physical layer:

Physical layer OSI model की 1st layer है। इस layer में data bits में convert हो जाता है। इस layer के द्वारा डेटा physical mediums ... OSI Protocol me Physical Layer Kya Hota Hai.

02). The Data Link Layer:

Data link layer OSI model की 2nd layer है। ये layer network के अंदर data को transport करने के लिए responsible होती ... Data Link Layer Kya hota hai

03). The Network layer:

Network layer OSI model की 3rd layer होती है। ये layer network communication के लिए responsible होती है। Network layer में data packets में convert हो ... Network layer Kya Hai




04). The Transport layer :

Transport layer OSI model की 4th layer होती है। ये layer data के reliable transfer के लिए responsible होती है। Data order में और error free पहुंचे ये इसी layer की जिम्मेदारी होती है ... Transport Layer Kya Hai

05). The Session layer:

Session layer OSI model की 5th layer है। ये layer sender और receiver के बीच session establish करती है, उस session को जब तक maintain करती है ... Session Layer Kya Hai

06). The Presentation layer:

Presentation layer OSI model की 6th layer होती है। ये layer data के presentation के लिए responsible होती है। ये layer ये verify करती है की ... Presentation Layer Kya Hai

07). The Application layer:

Application layer यूज़र की एप्लीकेशन और नेटवर्क के बीच इंटरफ़ेस प्रोवाइड करती है। जैसे की एक Web Browser ... Application Layer Kya Hai


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May 31, 2019

C Language Overview - C Programming Language हिंदी में

C Language एक Structured Programming Language हैं। C Programming Language को सन् 1973 में,  Dennis Ritchie के द्वारा Bell Laboratories में develop किया था। C Language का use System Software और Operating System बनाने के लिए किया जाता है।

C Programming in hindi: 

C Language आज की सबसे popular computer languages में से एक है। C Language को UNIX operating system को लिखने के लिए विकसित किया गया था। UNIX Operating System आज के समय में use होने वाला सबसे ज्यादा popular network operating system है।

C Language को आज के सभी modern programming languages के mother language के रूप में जाना जाता है, क्योंकि बहुत से Compilers, JVM, Kernels को C Language में लिखा गया हैं और अधिकांश programming languages जैसेः C ++, Java, C#  ये सभी C syntax को follow करती हैं।

Overview of C Programming Language

C Language एक high-level और General-purpose programming language है, जो firmware और portable applications को विकसित करने के लिए एक बेहतर programming language है। Windows, UNIX, Linux आदि Operating Systems, Oracle Database, MySQL, MSSQL Server, IIS, Apache Web Server, PHP आदि सभी “C” Language में ही Develop किये गए हैं।

 यह भी पढ़े:  ➧ Data Structure in Hindi

C Language का इतिहास - History of C

C Programming Language तीन अलग-अलग Structured language ALGOL, BCPL और B Language से विकसित हुई है। ALGOL  आधुनिक भाषाओं की जड़ ALGOL है, जिसे International Group ने सन् 1960 के दशक की शुरुआत में पेश किया।

Martin Richards ने 1967 में BCPL मतलब Basic Combined Programming Language बनाया। बाद में Ken Thompson ने BCPL को और develop करके BCPL को नया प्रारूप "B Language" का अविष्कार किया। इसके उपयोग से Ken Thompson ने Basic तरह की Unix Operating System बनाई।

उसके बाद Dennis Ritchie ने "B Language" को Develop करके Bell Laboratory में C Programming Language बनाई। सन् 1988 में, भाषा को ANSI द्वारा formalised किया गया, जिसे "ANSI C" कहा गया।

सन् 1990 में, C भाषा के एक संस्करण को अंतर्राष्ट्रीय मानक संगठन (ISO) द्वारा अनुमोदित किया गया था और C के उस संस्करण को C89 भी कहा जाता है।

C Language का Latest Version 'C11' हैं, जिसे 2011 में पेश किया गया था। C Language के latest version C11 में कई नई विशेषताओं को जोड़ा गया है।

 यह भी पढ़े:  C++ Programming Hindi me - OOPS Concept

C Programming Language Popular क्यों है?

C Programming में लिखे गए किसी Programs को execute करने के लिए बहुत कम समय लगता है। C Language का उपयोग मुख्य रूप से system level programs लिखने के लिए किया जाता था, जैसे किसी तरह के खास operating systems को design करना।

इसके अलावे C Language का उपयोग कर Text Editors, Compilers, Network Drivers, Databases, Language Interpreters जैसे जरुरी Program को भी बहुत अच्छी तरह से design और develop किया जा सकता हैं।

C language की popularity का कारण उसके features रहे है। ये features C language को unique और powerful बनाते है।

C Language के कुछ important features:

  • C Language एक Mid-level programming language भी हैं। 
  • किसी program को छोटे छोटे modules के रूप में create किया जाता है, जिन्हें functions कहा जाता है।
  • C high-level और low level दोनों तरह की applications create करने में सक्षम है।
  • आप स्वयं द्वारा बनाए गए libraries को जोड़ सकते है और उनका उपयोग कर सकते है।
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April 2, 2019

Data Structure Kya hai? What is Data Structure In Hindi

Data Structure In Hindi: Data किसी भी तरह के facts और figures का एक Collection है, जो किसी particular format में होता हैं। Computer में, Data Structure एक बहुत ही Important Programming Concept हैं। यह हमें आसान और Efficient तरीके से किसी Data को Store करने, Organize करने और ज़रूरत होने पर Data को Retrieve करने में help करता हैं।

Data Structure in hindi:

Data Structure Kya haiकिसी Computer System में Data को Store और Organize करने का एक Process है, जिससे कि हम Data का आसानी से इस्तेमाल कर सकें। Data को इस प्रकार Organize कर रखा जाता है कि उसको बाद में किसी भी समय आसानी से Access किया जा सकें।

What is Data Structure in Hindi

किसी Data को अलग-अलग तरीकों से Logically या Mathematically Organize करना,  Data Structure कहलाता है। 

  यह भी पढ़े:  ➧   C in Hindi - C Language Kya hai

Data Structure Example:

मान लीजिये कि हमारे पास कुछ Data है, जिसमें किसी Shop के Customer का नाम "Kanan" और उसकी उम्र 26 है। यहां "Kanan" एक String Data का प्रकार है और 26 Integer Data का।

हम इस Data को Customer Records के रूप में organize कर सकते हैं, जिसमें Customer का नाम और उम्र दोनों होंगे। अब हम Customer's के नाम से जुड़े Record को किसी File में, Data Structure के रूप में Collect कर रख सकते हैं। For Example: "Mohan" 45, "Rahul" 21, "Priti" 23

Types of Data Structure:

types of data structure in hindi

Data Structures को उनकी Properties के अनुसार कई अलग अलग प्रकार में बाँटा गया है। मुख्य रूप से Data Structure दो प्रकार के होते है, जिनको कई Sub-type में बटां जाता हैं:-
  1. Primitive Structure, और 
  2. Non-Primitive Structure
 तो चलिए जानते हैं कि Primitive Data Structure और Non-Primitive Data Structure क्या होता हैं?:

#1. Primitive Data Structure: 

Primitive Data, उन Data Structure को कहते है जिनको Computer द्वारा दिये गये Instructions से Direct Operate किया जा सकते है। इन्हें Built-in Data Types भी कहते है।

Primitive Data Structure के प्रकार:-
  • Integer: किसी Integer को Define करने के लिए 'int' का use किया जाता है, इसमे Decimal के अलावा अन्य सभी संख्याएं होती हैं। (Example: int a =7;)
  • Character: इसका इस्तेमाल Alphabet को Store करने के लिए किया जाता है, Character को Define करने के लिए char का प्रयोग किया जाता है तथा उस Character को char ‘x’ के रूप में लिखा जाता हैं। 
  • String: Character के Groups को String कहा जाता है और इसे Define करने के लिए string का use होता है। String को string "shivam" के रूप में लिखा जाता हैं।
  • Float: किसी Decimal Number को Float में define करते है। Example: float a =4.2;
 यह भी पढ़ें:  ➧ What is OOPs Concept in Hindi - C++ Programming Hindi me

#2. Non-Primitive Data Structure: 

Non-Primitive, वैसे Data Structure को कहते है जो Computer द्वारा दिये गये Instructions से सीधे Operate नहीं होती या किया जा सकता है और यह अलग अलग Primitive Data Structure के Combination हैं। इन्हे Derived Data Types भी कहते है।
Non-Primitive Data Structure के प्रकार:
  • Linear Data Structure: इसमें Data Value को रैखिक रूप में Store और Organize किया जाता है, जिसमें Data Value एक रेखा के रूप में दूसरे से जुड़ा होता है। Example: Array, Stack, Queue, linked lists आते हैं।
  • Non-Linear Data Structure: जिसमें Data Value को Sequential तरीके से Organize नहीं किया गया होता है। इसमें एक Data Value किसी Other Data Value से जुड़ा हो सकता हैं। Example: Tree, Graph आदि।

Operations on Data Structures हिंदी में: 

किसी Data पर किए जाने वाले Important Operations है:
  • Insertion: Data Structure में एक नए Data Value को जोड़ना। 
  • Deletion: किसी Data Value को, Data Structure से हटाना। 
  • Searching: पहले से मौजूद Data Structure में किसी Data Value को खोजना। 
  • Traversal: Data Structure में मौजूद Data Value को संसाधित (processing) करना। 
  • Sorting:  किसी Specific Order में Data को Arrange करना। 
  • Merging: दो समान Data Structure के Values को एक साथ मिलाना।
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आप हमे जरूर बताये आपको "डाटा स्ट्रक्चर के बारे में" दी गयी जानकारी कैसी लगी, कोई सुझाव या जानकारी हो तो जरूर Comment ज़रूर करें। आप "Data Structure हिंदी में" को अपने friends के साथ जरुर Share जरुर करें। 

March 12, 2019

Artificial Intelligence Hindi me, Artificial Intelligence क्या है?

What is Artificial Intelligence (AI)? - आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के बारे में हिंदी में जानकारी:

Artificial Intelligence, यानि कृत्रिम दिमाग। अगर हम Artificial Intelligence (AI) की बात करे तो यह Computer Science का ही एक Part है। इसका उद्देश्य बुद्धिमान मशीनें बनाना है, जो मनुष्यों की तरह काम करती हो और उन्हीं की तरह प्रतिक्रिया कर सकते हो।

AI आज के Information Technology का एक बहुत जरुरी हिस्सा बन गया है। जब से Computer's के आविष्कार के बाद से ही इंसानों ने इसका इस्तेमाल हर तरह के कामों में काफी किया है जिसके कारण हमारी Dependency भी इनपर बढ़ी हैं। इसी का नतीज़ा हुआ ऐसी मशीनों को बनाने की, जो इंसानो की सोच रखें और हर काम आसान हो जाए।

सबसे पहले Artificial Intelligence के बारे में अमेरिकी Computer Scientist John McCarthy ने दुनिया को 1956 में the Dartmouth Conference में बताया था।

आज हम इस लेख मे जानेंगे कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) क्या है?

Artificial Intelligence (AI) क्या है?

Artificial Intelligence इस सिद्धांत पर आधारित है कि इंसानी सोच यानि कि मानव बुद्धिमत्ता (human intelligence) और उसके सोचने के तरीकों को इस तरह से Programme करना कि कोई Computer System या Machine's इंसानी सोच की आसानी से नकल कर सके और सभी तरह के कामों को करने में सक्षम हो सके। फ़िर यह काम सबसे आसान या कठिन हो।

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की आदर्श विशेषता इसकी क्षमता है कि यह किसी विशेष लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता को तर्कसंगत बनाने और लेने की क्षमता रखता है। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस शब्द का इस्तेमाल किसी भी मशीन के लिए उपयोग में लाया जा सकता है, अगर वह मानव मन से जुड़े लक्षणों जैसे कि सीखने और किसी समस्या को सुलझाने की क्षमता रखता है। सभी तरह के AI Processes में Learning ( किसी जानकारी को लेना, उपयोग करने का तरीका, सूचना और नियमों की समझ), Reasoning ( किसी अनुमानित या निश्चित निष्कर्ष तक पहुंचना) और स्वयं से Correction करना शामिल हैं।

 इसे भी पढ़ें: What is Computer Programming Hindi me 

Artificial Intelligence को दो Different Categories होती है:
  • Weak Artificial Intelligence और 
  • Strong Artificial Intelligence में।  
आइए जानते हैं कि इन दोनों तरह की Intelligence's में क्या अंतर हैं।

Weak Artificial Intelligence:

इस कृत्रिम बुद्धिमत्ता में किसी विशेष कार्य को करने के लिए Design किया गया होता है। यही वजह है कि Weak AI, बताए हुए काम को ही कर सकता है और उस पर लगाए गए नियमों से बंधा होता है और यह उन नियमों से आगे नहीं जा सकती है। Apple का Siri, Weak AI का एक बहुत अच्छा उदाहरण है। Weak AI को Narrow Artificial Intelligence भी कहा जाता हैं।

Strong artificial intelligence:

Strong AI वे System होते हैं, जो मानव के समान माने जाने वाले कामों को करते हैं। ये अधिक जटिल और जटिल प्रणाली होते हैं। उन्हें उन परिस्थितियों को संभालने के लिए प्रोग्राम किया जाता है जिनमें उन्हें किसी व्यक्ति के हस्तक्षेप के बिना समस्या को हल करने की आवश्यकता हो सकती है। इस तरह के System को Self-driving Cars या Hospital के Operation Room में उपयोग किया जाता है।


 इसे भी पढ़ें:  ➧ What is Software Engineering in Hindi

Artificial Intelligence के Applications:


कृत्रिम बुद्धिमत्ता की Accuracy और Efficiency के कारण ही आज AI Technology को कई अलग-अलग Sectors/ Industries में Use किया जाने लगा हैं।

➥ Manufacturing Sectors: 

जैसे जैसे मशीनों का उपयोग बढ़ा, ज्यादा प्रभावी और विकसित मशीनो ने इंसानो की जगह काम करना शुरू कर दिया। जिस काम के लिए पहले सेकड़ों लोग लगाए जाते थे, आज एक मशीन की मदद से जल्दी और बेहतर किया जा सकता हैं।

➥ Business & Financial Sectors: 

बैंको में ATM और Automatic Transfer से लेकर, Share Market में ट्रेडिंग को आसान बनाने के लिए, इन सभी में Artificial Intelligence का उपयोग हो रहा हैं। बहुत सी Companies को पहले अपने Growth, Loss और Profit इन जैसे सभी तरह के Data analysis में पहले खूब सारा पैसा और समय लगाना होता था।

➥ HealthCare Sectors: 

हर तरह की दवाइयों और अलग रोगियों में अलग-अलग उपचार के लिए और AI-Powered Technology किसी Tissue Samples के विश्लेषण में Pathologists की Accurate तरीक़े से Diagnosis में मदद करती है।

इन सब के अलावा आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग Shopping, Gaming, Agriculture, Space Exploration, Artificial Creativity, Travel और navigation, Creative arts और Social Media तक में किया जा रहा हैं।

Artificial Intelligence और Daily Life:


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) आज हम सभी की Daily Life का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है और यह लगभग हर जगह है, फ़िर चाहे आप इसे महसूस करें या न करें। हर बार जब आप Google पर कुछ Search करते हैं, कोई Online Ticket बुक करते हैं, या फिर किसी Shopping Site से कोई Product की Recommendation प्राप्त करते हैं, या अपना Social Media Account Acess करते हैं, यह सभी कुछ ऐसे ही उदाहरण हैं जहाँ Artificial Intelligence होता है।

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February 19, 2019

[Hindi] What is Asynchronous Transfer Mode (ATM) in Computer Networking

ATM का Full Form Asynchronous Transfer Mode होता हैं। जिसे Cell Relay (किसी data को एक निश्चित आकार के Cell  में Transfer करना) भी कहा जाता है। ATM OSI Model के Second Layer यानि Data Link Layer पर काम करता हैं। ATM एक High-Speed Switched Network Technology है।

Asynchronous Transfer Mode (ATM) का उपयोग Telecommunication Networks के द्वारा किया जाता है, जो किसी Data को Small, fixed-sized cells में Encode करने के लिए Asynchronous Time-Division Multiplexing का उपयोग करता है।

Asynchronous Transfer Mode, Ethernet और Internet से अलग होता है, जो Data or frames के लिए Variable packet sizes का उपयोग करते हैं।

What is ATM in Hindi

ATM एक Dedicated Connection-Oriented Switching तकनीक है, जिसमे Data के Transmission के लिए Packet Switching तकनीक का use होता है। इसका उपयोग High-Speed वाले LAN Broadband और WAN Network में Data Transmission के लिए किया जाता है।

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ATM सभी प्रकार के Traffic जैसे Voice, Video, Fax और Data को एक साथ 155 Mbps की Speed से ले जा सकता हैं। इसमें use होने वाले Data Units को Cell कहते हैं, जिसमे हर ATM Cell की size fix रहती हैं। प्रत्येक ATM Cell की Size 53 Byte की होती है, जिसमें 5 Byte का Use Header के लिए और बाक़ी के 48 Byte का उपयोग User Data के लिए होता हैं।

In Short:
Asynchronous Transfer Mode: कंप्यूटर नेटवर्क पर बहुत अधिक गति की दरों पर छोटे, निश्चित समूहों में Data, Sound और Pictures को Transfer करने के लिए Set of Rules हैं। 

Asynchronous Transfer Mode में मुख्यरूप से चार अलग-अलग Bit Rate के Option होते हैं:-
  • Available Bit Rate (ABR): इसमें Data Transfer की Minimum Capacity की Guarantee होती हैं लेकिन Network में कम Traffic होने पर तेज भी आ सकती हैं।
  • Constant Bit Rate (CBR): इसमें Data Transfer एक Constant Bit Rate पर होती हैं। 
  • Unspecified Bit Rate (UBR): किसी भी Bit Rate की गारंटी नहीं देता है और इसका उपयोग ऐसे file transfers के लिए किया जाता है, जो किसी भी delay को सहन कर सकते हैं।
  • Variable Bit Rate (VBR): इसका इस्तेमाल अधिकतर Audio और Video Conferencing के लिए एक popular choice है।

Computer Networking में ATM क्या होता है? "Asynchronous Transfer Mode हिंदी में" इसे अपने friends के साथ जरुर Share जरुर करें। 

February 6, 2019

What is Transport Layer Security (TLS) in Hindi, TLS Protocol क्या हैं.?

Transport Layer Security, Secure Sockets Layer (SSL) का एक नया Improved version या एक नयी पीढ़ी है, जो किसी Data और Information को Encrypt कर उसे Transfer करने के लिए Use किया जाता हैं।

What is TLS in Hindi:

TLS एक ऐसा Protocol हैं, जिसका इस्तेमाल Internet के जरिये किसी दो Server Applications के बीच Data और Information को Secure करने के लिए किया जाता है।
Transport Layer Security (TLS), OSI Model के Application layer में काम करता हैं।  
आसान शब्दों में Transport Layer Security,

TLS, किसी दो Network में Communicate करने के लिए end-to-end सुरक्षा प्रदान करता है और इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा Internet से संचार में और Online Transactions के लिए किया जाता है।
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Transport Layer Security, Internet के जरिए दो अलग अलग प्रकार के Nodes के बीच होने वाले किसी भी Data Transfer के लिए Privacy, Integrity और उसके लिए Protection देता या बनाता है।

TLS का मुख्य रूप से उपयोग Secure Web Browsing, Applications Access, Data Transfer और Internet Communication के लिए होता है। TLS किसी भी भेजे गए या संचारित किए गए किसी Data को किसी भी तरह से Tampered होने से रोकता है।

TLS का उपयोग, Web Browsers, Web Servers, VPNs और Database Servers को Secure करने के लिए किया जाता है।

Different Layers of Transport Layer Security:

TLS Protocol में Sub-protocols की दो अलग-अलग Layers होती हैं।

➥ Transport Layer Security Handshake Protocol:

किसी भी Client और Server को एक दूसरे को प्रमाणित(Authenticate) करने और उसके बाद Data को भेजने से पहले एक Encrypt किए हुए Algorithm का Use कर उस Data के लिए सही Client/Server को चुनता है।

➥ Transport Layer Security Record Protocol:

TLSRP, TCP Protocol के ऊपर में काम करता है और इस बात को भी Confirm करता हैं कि जो Connection Established हुआ, वो Secure और Reliable है। TLS Record Protocol Data Encapsulation और Data Encryption की Service भी प्रदान करता है।

TLS क्या होता है.? "Transport Layer Security in Hindi" इसे अपने friends के साथ जरुर Share जरुर करें। 

October 19, 2018

Computer Kya Hai हिंदी में जानकारी - What is Computer in Hindi

Computer kya hai in Hindi, अगर Computer के बारे में बात करे तो, 'Computer' English के “Compute” शब्द से लिया गया है जिसका मतलब “गणना करना” होता है। Computer एक ऐसा Electronic Device है, जो किसी User के द्वारा Input किए गए Data को किन्हीं विशेष निर्देशों के मुताबिक प्रक्रिया करके सूचनाओ को Result के रूप में देता हैं।

What is Computer in Hindi?

Computer एक Programmable Electronic Machine है, जो Electronic Devices से मिलकर बना होता हैं। Computer किसी Software या Hardware Program द्वारा दिए गए Instructions के आधार पर process, calculate और Operate करता है।

what is computer in hindi - computer kya hai

Computer किसी Input Device के जरिए Raw Data को Accept कर उसे दिए गए निर्देशों के साथ Processes करता हैं और उसका Output देता हैं। Computer की सबसे बड़ी ख़ूबी उसकी Storage Capability होती हैं जिसके जरिए Saved Information को जरूरत होने पर निकाला और इस्तेमाल किया जा सकता हैं।
Computer किसी User के द्वारा Input किए गए डाटा को Process कर, उसके लिए परिणाम को Output के रूप में देता हैं। 
किसी भी Computer को उसकी Computing power, Capacity, Size और Mobility जैसे कारकों (factors) के अनुसार Classified किया जाता है।

Computer में दो Basic Element होते हैं:-

➥ Hardware: Physical Body जिसमें Computer का Processor, Memory, Storage और कई तरह के अन्य Peripheral devices आते हैं।

➥ Software: Operating system(OS) और Applications Software, एक तरह के Program (Set of  Instruction) जो किसी कार्य को करने मदद करते हैं।

 इसे भी पढ़ें:  ➧ Types of Computer Networks

Characteristics of Computer in Hindi:

Computer की कुछ विशेष Characteristics निम्न प्रकार से है:-
  • Automatic: Computer एक स्वचालित उपकरण है मतलब यह एक बार User से सारा डाटा इनपुट के रूप में ले कर उसका विश्लेषण कर परिणामों को आउटपुट के रूप में देता है।
  • Fast speed: एक बार डेटा इनपुट करने के पश्चात उन्हें दिए गये निर्देशों के अनुसार एक सेकंड में लाखों बार गणनाएं कर सकता है। इसकी काम करने की गति बहुत तेज होती है।
  • Multi-Tasking: Computer की सहायता से बहुत से काम एक साथ किए जा सकते हैं। जैसे एक ही समय में Music सुनते हुए Photo Editing या फ़िर कोई Mail भेजना।  
  • Accuracy: अगर User data input करते समय कोई गलती नही करता, तो Computer Input किए, Data का विश्लेषण कर हमे आवश्यक परिणामों देता है जो Error Free होता है।
  • Secrecy: Computer में Data Security के लिए Password की सुविधा होती है जो Personal data को Confidentially रखने में help करता हैं।
  • Storage Capacity: Data को Store करने के लिए Internal & External Storage (Hard disk, CD ROM और DVD इत्यादि) होता हैं।

Types of Computer in Hindi:

Computer's को आमतौर पर उनके आकार और शक्ति द्वारा वर्गीकृत किया जाता है, Computer के Types हैं:-
  • Personal Computer: Microprocessor पर आधारित एक छोटा Single User Computer जो साधारण रूप से Data Store करने के लिए, Input Devices, Output Show करने के लिए एक Monitor और एक Storage HDD के साथ होता है।
  • Minicomputer: एक बहु-उपयोगकर्ता कंप्यूटर जो एक साथ 10 से सैकड़ों उपयोगकर्ताओं को Access देने में सक्षम है।
  • Mainframe Computer: एक शक्तिशाली बहु-उपयोगकर्ता कंप्यूटर जो एक साथ कई सैकड़ों या हजारों उपयोगकर्ताओं का समर्थन करने में सक्षम है।
  • SuperComputer: एक बहुत तेज़ कंप्यूटर जो प्रति सेकंड लाखों निर्देशों का प्रदर्शन कर सकता है।
  • Workstation: एक शक्तिशाली, एकल-उपयोगकर्ता कंप्यूटर। एक कार्य केंद्र एक व्यक्तिगत कंप्यूटर की तरह है, लेकिन इसमें अधिक शक्तिशाली माइक्रोप्रोसेसर और उच्च-गुणवत्ता वाला मॉनिटर है।

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September 11, 2018

Waterfall Model in Software Engineering in Hindi - Waterfall Model kya hai

Waterfall Model Kya hai Software Engineering me:

SDLC Waterfall Model को 1970 ईस्वी में Winston Royce द्वारा पेश किया जिसे समझना और उपयोग करना बहुत सरल है। Waterfall Model को Linear-Sequential life Cycle Model के रूप में भी जाना जाता है। Waterfall Model में, Development Process में कोई भी चरण केवल तभी शुरू होता है जब पिछला चरण पूरा होता है। इसका मतलब यह है कि एक Phase का Output दूसरे Phase के लिए Input की तरह कार्य करता है।

What is Waterfall Model in Hindi?

Waterfall Model सबसे शुरुआती SDLC approach है जिसका उपयोग Software Development के लिए किया गया था। Waterfall Model एक Sequential Model है। यानि एक Phase का Development तब तक शुरू नही हो सकता जब तक कि उसका पिछला Phase पूरा नही हो जाता है, यानि कि हम Waterfall Model में किसी भी Phases को Overlap नही कर सकते है।

What is Waterfall Model in Hindi

Waterfall Model में एक Phase ऊपर से निचे की ओर गिरते हैं, किसी जलप्रपात की तरह। इसी प्रकृति के कारण इसका नाम Waterfall Model दिया गया है। जिस तरह से एक बार जब पानी की कोई धारा पहाड़ से नीचे की ओर गिरने लगता है और यह पानी ऊपर की ओर वापस नही जा सकता है। ठीक इसी प्रकार waterfall model भी कार्य करता है, एक बार Development का एक phase पूरा हो जाता है तो हम अगले phase में चले जाते है और वापस पिछले phase में नही जा सकते है।

In Short, हम कह सकते है कि:
Waterfall Model में, एक चरण का विकास केवल तब शुरू होता है जब पिछला चरण पूरा हो जाता है। 

किसी बड़ी और Complex projects के लिए Waterfall Model अच्छा नहीं होता है क्योंकि उसमें Risk factor ज्यादा है। यह उन Projects के लिए भी Suitable नहीं है, जहाँ Requirements को अक्सर बदलाव किया जाता है।

छोटे Projects के लिए Waterfall Model अच्छी तरह से काम करता है और उचित परिणाम देता है। इस मॉडल में Final Product का delivery देर से होता है क्योंकि इसमें कोई Prototype नहीं होता है।

 इसे भी पढ़ें:  ➧ Prototype Model in Hindi - प्रोटोटाइप मॉडल क्या है.?

Phases in Waterfall Model (Hindi):

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Waterfall Model में निम्नलिखित 5 phases होते है:-

01). Requirement Phase:

इसमें System की सभी Requirements को एक ही जगह पर एकत्रित कर उसके document तैयार किया जाता है। Requirements के Documents को सावधानी से Store किया जाता हैं क्योंकि इसी फेज पर अगले phase आधारित होते हैं।

02). Design Phase:

इस Phase पहले चरण से प्राप्त आवश्यक Specifications का अध्ययन किया जाता है, और System Design को तैयार किया जाता है। यह Hardware और System Requirements को समझने में मदद करता है और पुरे System Architecture के बारे में भी बतलाता है।

03). Implementation Phase:

यहाँ इस Phase में Design Phase से प्राप्त सभी Input के साथ काम किया जाता हैं, सभी Hardware, Software और Applications को Install किया जाता है। प्रत्येक इकाई को उसकी कार्यक्षमता के लिए विकसित और परीक्षण किया जाता है जिसे इकाई परीक्षण कहा जाता है।

04). Verification Phase:

इसमें हर तरह से Software की Testing की जाती है और Software के सभी Parts को verify किया जाता है। कई तरीकों से Software का Evalution किया जाता है। ऐसा इसलिए की Software में कोई defact रह जाता हैं और इसका अच्छे से Verification नही किया गया हो तो Software के fail होने का Risk बना रहता है।

05). Maintenance Phase:

जब System बनके तैयार हो जाता है और User इसका उपयोग करना शुरू कर देते है तब Application बिना किसी Downtime के साथ काम कर रहा हैं या नहीं...इसपर ध्यान देना, जरुरत होने पर नए function के साथ System को Update करना, Customer के Feedback पर ध्यान देना Maintenance में शामिल होता हैं।

SDLC Waterfall Model में Maintenance के तीन प्रकार होते है:-
  1. Corrective Maintenance: इसका उपयोग उन Misteks को ठीक करने के लिए किया जाता है जिन्हें उत्पाद विकास चरण के दौरान नहीं खोजा गया था।
  2. Perfective Maintenance: Customer के अनुरोध के आधार पर System की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  3. Adaptive Maintenance: एक नए वातावरण, जैसे कि नए कंप्यूटर प्लेटफ़ॉर्म पर या किसी नए ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ काम करना।

 इसे भी पढ़ें:  ➧  Spiral Model क्या हैं.? (SDLC Spiral Model - Software Engineering)

Advantages & Disadvantages of Waterfall Model, हिंदी में:

Waterfall Model के Advantages:

SDLC Waterfall Model के कुछ प्रमुख फायदे हैं:-
  • यह बहुत सरल और समझने में आसान है।
  • इसमें सभी चरणों को एक बार में Process किया जाता है।
  • Model के प्रत्येक चरण को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
  • प्रक्रिया, कार्य और परिणाम बहुत अच्छी तरह से Documented होते हैं।
 इसे भी पढ़ें:  ➧ Iterative Model क्या है?

Waterfall Model के Disadvantages:

नीचे SDLC Waterfall Model की कुछ प्रमुख कमियां इस प्रकार से हैं:-
  • किसी भी Phase में Overlap नहीं किया जा सकता हैं। 
  • किसी भी Changes को adopt करने में मुश्किल होती हैं। 
  • Devlopment Process के हर चरण(Phase) के लिए समय और लागत का अनुमान लगाना मुश्किल है।

आज के समय में अधिकांश परियोजनाएं Agile Model और Prototype Model के साथ की जा रही हैं, लेकिन  Waterfall Model आज भी छोटे Projects के लिए अच्छा है।
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