February 19, 2019

[Hindi] What is Asynchronous Transfer Mode (ATM) in Computer Networking

ATM का Full Form Asynchronous Transfer Mode होता हैं। जिसे Cell Relay (किसी data को एक निश्चित आकार के Cell  में Transfer करना) भी कहा जाता है। ATM OSI Model के Second Layer यानि Data Link Layer पर काम करता हैं। ATM एक High-Speed Switched Network Technology है।

Asynchronous Transfer Mode (ATM) का उपयोग Telecommunication Networks के द्वारा किया जाता है, जो किसी Data को Small, fixed-sized cells में Encode करने के लिए Asynchronous Time-Division Multiplexing का उपयोग करता है।

Asynchronous Transfer Mode, Ethernet और Internet से अलग होता है, जो Data or frames के लिए Variable packet sizes का उपयोग करते हैं।

What is ATM in Hindi

ATM एक Dedicated Connection-Oriented Switching तकनीक है, जिसमे Data के Transmission के लिए Packet Switching तकनीक का use होता है। इसका उपयोग High-Speed वाले LAN Broadband और WAN Network में Data Transmission के लिए किया जाता है।

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ATM सभी प्रकार के Traffic जैसे Voice, Video, Fax और Data को एक साथ 155 Mbps की Speed से ले जा सकता हैं। इसमें use होने वाले Data Units को Cell कहते हैं, जिसमे हर ATM Cell की size fix रहती हैं। प्रत्येक ATM Cell की Size 53 Byte की होती है, जिसमें 5 Byte का Use Header के लिए और बाक़ी के 48 Byte का उपयोग User Data के लिए होता हैं।

In Short:
Asynchronous Transfer Mode: कंप्यूटर नेटवर्क पर बहुत अधिक गति की दरों पर छोटे, निश्चित समूहों में Data, Sound और Pictures को Transfer करने के लिए Set of Rules हैं। 

Asynchronous Transfer Mode में मुख्यरूप से चार अलग-अलग Bit Rate के Option होते हैं:-
  • Available Bit Rate (ABR): इसमें Data Transfer की Minimum Capacity की Guarantee होती हैं लेकिन Network में कम Traffic होने पर तेज भी आ सकती हैं।
  • Constant Bit Rate (CBR): इसमें Data Transfer एक Constant Bit Rate पर होती हैं। 
  • Unspecified Bit Rate (UBR): किसी भी Bit Rate की गारंटी नहीं देता है और इसका उपयोग ऐसे file transfers के लिए किया जाता है, जो किसी भी delay को सहन कर सकते हैं।
  • Variable Bit Rate (VBR): इसका इस्तेमाल अधिकतर Audio और Video Conferencing के लिए एक popular choice है।

Computer Networking में ATM क्या होता है? "Asynchronous Transfer Mode हिंदी में" इसे अपने friends के साथ जरुर Share जरुर करें। 

February 6, 2019

What is Transport Layer Security (TLS) in Hindi, TLS Protocol क्या हैं.?

Transport Layer Security, Secure Sockets Layer (SSL) का एक नया Improved version या एक नयी पीढ़ी है, जो किसी Data और Information को Encrypt कर उसे Transfer करने के लिए Use किया जाता हैं।

What is TLS in Hindi:

TLS एक ऐसा Protocol हैं, जिसका इस्तेमाल Internet के जरिये किसी दो Server Applications के बीच Data और Information को Secure करने के लिए किया जाता है।
Transport Layer Security (TLS), OSI Model के Application layer में काम करता हैं।  
आसान शब्दों में Transport Layer Security,

TLS, किसी दो Network में Communicate करने के लिए end-to-end सुरक्षा प्रदान करता है और इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा Internet से संचार में और Online Transactions के लिए किया जाता है।
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Transport Layer Security, Internet के जरिए दो अलग अलग प्रकार के Nodes के बीच होने वाले किसी भी Data Transfer के लिए Privacy, Integrity और उसके लिए Protection देता या बनाता है।

TLS का मुख्य रूप से उपयोग Secure Web Browsing, Applications Access, Data Transfer और Internet Communication के लिए होता है। TLS किसी भी भेजे गए या संचारित किए गए किसी Data को किसी भी तरह से Tampered होने से रोकता है।

TLS का उपयोग, Web Browsers, Web Servers, VPNs और Database Servers को Secure करने के लिए किया जाता है।

Different Layers of Transport Layer Security:

TLS Protocol में Sub-protocols की दो अलग-अलग Layers होती हैं।

➥ Transport Layer Security Handshake Protocol:

किसी भी Client और Server को एक दूसरे को प्रमाणित(Authenticate) करने और उसके बाद Data को भेजने से पहले एक Encrypt किए हुए Algorithm का Use कर उस Data के लिए सही Client/Server को चुनता है।

➥ Transport Layer Security Record Protocol:

TLSRP, TCP Protocol के ऊपर में काम करता है और इस बात को भी Confirm करता हैं कि जो Connection Established हुआ, वो Secure और Reliable है। TLS Record Protocol Data Encapsulation और Data Encryption की Service भी प्रदान करता है।

TLS क्या होता है.? "Transport Layer Security in Hindi" इसे अपने friends के साथ जरुर Share जरुर करें। 

January 19, 2018

EFT Kya hai, Electronic Fund Transfer in Hindi

Electronic Fund Transfer (EFT) अपने आप में EFT को Define करता है, अपने नाम के अनुसार ही इसमें Funds को यानि Money को हम Electronic way में Transfer कर सकते है।

EFT in Daily Life, आज के समय में अगर आपने खरीदी गई, कोई सामान का बिल अपने ATM या फिर Phone से Pay किया हो या अपना मोबाइल Recharge किया हो, तो आप जानकर हैरान होंगे कि इसके पीछे जो Technology काम करतीं है, वो "EFT" ही होता है

EFT क्या होता है.? EFT Hindi me:

Electronic Fund Transfer (EFT) एक Electronic Payment System है जिसके द्वारा कोई भी User किसी भी बैंक की Branch(शाखा) से Same Branch या किसी भी अन्य बैंक में किसी व्यक्ति, Company या किसी Corporate के खाते में Fund Transfer कर सकता हैं, वो भी बिना किसी Paper को use किए।

Kya Hai Electronic fund transfer, EFT in Hindi


Electronic Fund Transfer (EFT)  के द्वारा होने वाले सारे Transactions को Generally, Electronic Banking के नाम से जाना जाता है और EFT के Through किए गए Direct Deposit को e-Check यानि  Electronic Check कहा जाता है। NEFT और RTGS एक प्रकार के EFT ही है।

Types Of Electronic Fund Transfer (EFT):

अगर हम Types of EFT की बात करे तो Funds Transfer करने के बहुत से Electronic ways मौजूद हैं, पर मैं यहाँ पर आपको Daily Life में use होने वाले Important EFT के types के बारे में बतायुंगा जो निम्नलिखित है:-

  1. Direct Deposit: आज के समय में किसी भी Industry में अपने Client, Partners या फिर अपने किसी भी Employee को बिना Bank जाए Direct Deposit Method का use कर Payment कर दिया जाता है। 
  2. Wire Transfers:  आप अगर विदेश में पैसा भेजना या वहाँ से पैसे मांगना चाह्ते है, तो आप Wire Transfer का use करते है। इस Transfer method के through आप बहुत बड़ी रकम को आसानी से और fast Process कर सकते है। 
  3. ATMs:  ATM जिसे Plastic Money भी कहा जाता है का use आप बिना Bank जाए, अपने Paise को अपने मर्ज़ी से निकाल सकते है, किसी को Payment कर सकते है और आप ATM का use पैसे भेजने में भी कर सकते है।   
  4. Debit / Credit Cards:  किसी भी Financial Transaction को करने में help करता है। इसका use आप अपने Account से किसी को Bill Pay करने में और Online Shopping के समय करते है।    
  5. Personal Banking: इसके Through आप अपने कंप्यूटर या Laptop में अपने Acccount की सारी जानकारी और पैसे भेजने के लिए करते है आप इसका इस्तेमाल भी अन्य सभी EFT Transaction को पूरा करने में भी कर सकते है।
  6.  Pay-by-Phone: आज के Digital World में अधिकतर लोगों के पास एक Technology उनके साथ होती है और वह हमारा छोटा सा Phone हैं। जो एक चलता फिरता बैंक है। आपको बहुत सारे Financial Apps के बारे में जानकारी होगी जैसे SBI Quick Pay, Mobikwik, BHIM, e.t.c. का use पैसे से जुड़े Transaction के लिए हम करते है। 
  7. Electronic Checks: ये Paper Check की तरह ही काम करता है, लेकिन Electronic format में होता है। अगर आपको किसी को पैसे pay करना है तो आप Payment लेने वाले का Account Number, Bank का Routing number और Security Code (digital signature) की जरुरत होती है।
इसे भी जानें: Network Topology Kya Hai

EFT Use करने का Advantage और Disadvantages:

Advantages of EFT in Hindi

  • Time savings
  • Expenses control
  • Reduced risk of loss and theft
  • User-friendly
  • Convenience

Disadvantages of EFT in Hindi

  • Restrictions in Tran
  • The risk of being hacked
  • lack of anonymity
  • The necessity of Internet access
EFT क्या होता है.? Types of Electronic Fund Transfer in Hindi, इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रान्सफर से लाभ और हानि  इसे अपने friends के साथ जरुर Share जरुर करें। 

January 17, 2018

What is Secure Sockets Layer (SSL) In Hindi? Definition & How SSL Works

SSL का पूरा नाम Secure Sockets Layer हैं और इसका उपयोग Web Server और Client के बीच Secured Connection Create करने के लिए होता हैं। SSL को Netscape ने सन 1990 ईस्वी में विकसित किया था।

SSL यह सुनिश्चित करता है कि किसी Web-Server और browser के बीच संचारित कोई भी Data Encrypted रहे, जिससे भेजी गई कोई भी Information को Tampering और किसी Data forgery से बचाया जा सके।

What is SSL in Hindi.?

Secure Sockets Layer, एक प्रकार का Standard Protocol है। SSL का उपयोग किसी Network पर भेजे गए Documents के सुरक्षित प्रसारण(Transmission) के लिए किया जाता है। SSL किसी Nodes के बीच Communicate करने के लिए Transport Control Protocol (TCP) का उपयोग करता है।

SSL में, Socket शब्द एक Network पर Client और Server के बीच Data transfer करने के Process से है।

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SSL Protocol In Hindi:

किसी भी तरह के Online Transaction के समय Web server को SSL Certificate की आवश्कता पड़ती है, यह एक Secure SSL Connection के लिए जरुरी होता हैं।

SSL Transport Layer के उपर Network से Connect होने वाले या भेजे जाने वाले Data Segments को Encrypt करता है, जो Program layer में काम करने वाला एक Network Component है।

SSL में, Asymmetric Cryptographic method का use होता है, जिसमें कोई भी एक web browser एक public key और private key बनाता है।

SSL की बात की जाए तो ये Transport Layer Security का earlier version है, जो सुरक्षित Internet Data Transmission के लिए एक तरह का Cryptographic Protocol है।

Objectives of SSL in Hindi:

किसी भी Network में एक SSL का use करने का मुख्य Objectives निम्न हैं:-
  • Data Privacy: किसी भी Data की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए। इसके लिए SSL Record Protocol, SSL Handshake Protocol और SSL Alert Protocol जैसे विभिन्न तरीक़े को उपयोग में लाता हैं।
  • Data Integrity: किसी भी प्रकार के Tampering मतलब छेड़छाड़ से बचाता हैं।
  • Client-server authentication: SSL Protocol इसके जरिए किसी Client और Server को प्रमाणित करने के लिए Standard Cryptographic Techniques का उपयोग कर Authenticate करता है। 

SSL / TLS Certificate क्या है?


SSL/TLS Certificate एक प्रकार की Data File होती हैं, जिसमें किसी Organization के सारी जानकारी को एक विशेष रूप से उपयोग की गयी Cryptographic key में समाहित / बांध कर रखी गई होती हैं।

जब किसी Web Server पर SSL/TLS Certificate को Install किया जाता हैं, तब ये Web server और उससे जुड़ने वाले Browser के बीच एक सुरक्षित सम्बन्ध (Secured Connection) को Enable करता है।

SSL Certificate के उपयोग पर किसी Website का URL "http://" के बजाय "https://" के साथ जुड़ा हुआ आता है और आपके Browser के Address Bar पर Web-Address के बाईं ओर, एक Padlock (🔒) दिखाई देता है।

यदि कोई Website एक प्रमाणित SSL / Transport Layer Security (TLS) Certificate का उपयोग करती है, तो आपके Browser (मुख्यः रूप से Internet Explorer, Mozilla FireFox और Google Chrome) पर Web-address एक हरे रंग के Padlock (🔒) के साथ दिखाई देता है।


⏩ Web Browser के बारे में जाने। 

What is SSL used for? हिंदी में:

SSL Protocol का उपयोग विश्व भर में Online Business करने वाली Organization या फिर किसी भी तरह की कोई सेवा देने वाली Website द्वारा किया जाता है। E-Commerce वाली Website ऐसा अपने Customer की निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए और Online Transaction को Confidential और Secured रखने के लिए किया जाता हैं। कोई भी ऐसी Website जो किसी भी रूप में अपने web page पर आने वाले Visitors / Customer की व्यक्तिगत जानकारी, Password, उनके Bank details या Credit Card की जानकारी लेती/ माँगती हो SSL Encryption का उपयोग ज़रूर करना चाहिए।

SSL Protocol कैसे काम करता हैं?

SSL Protocol दो तरह की Key का Use करती है। इनमें एक Public Key और दूसरी Private Key होती है ये दोनों Key एक साथ मिलकर एक Secured Connection बनाती है जिससे Data सुरक्षित Share होता रहता है। Public Key का इस्तेमाल Information Encrypt करने के लिए और Private Key का इस्तेमाल Information को Decrypt करने के लिए किया जाता है।

How Does SSL Work.? हिंदी में:

मान ले किसी User को किसी Topic के बारे में जानकारी चाहिए तो वह उस Content को अपने Browser में Search करता है। तब Browser उस Website के Sever से जुड़ता है, जहाँ उस Content से जुड़ी जानकारी हो। उसके बाद नीचे दिए Process होते हैं:-
  1. Browser DNS Server से उस Website का IP address प्राप्त करता है उसके बाद उस Website से एक Secure Connection के लिए Request करता है।
  2. इस Secure Connection को शुरू करने के लिए, आपका Browser उस Server से उसकी पहचान करने के लिए Server को SSL Certificate की एक Copy की माँग करता हैं।
  3. आपका Browser Server में मौजूद Data और SSL Certificate की जाँच करता है।
  4. जब Browser Confirm करता है कि Website पर भरोसा किया जा सकता है। तब Web-browser एक Symmetric Session key बनाता है, जिसे वह Website के SSL Certificate में Public key के साथ Encrypt करता है और Session key को Web-Server पर भेज देता है।
  5. उसके बाद Web-Server Symmetric Session key को decrypt करने के लिए अपने Private key का उपयोग करता है।
  6. इसके बाद Server एक Acknowledgement (पावती) भेजता है, जिसे वह Session key के साथ Encrypted किए रहता है।
  7. उपरोक्त सभी प्रकिया पूरी होने के बाद Server और Browser के बीच Transmit (प्रसारित) होने वाली सभी Data(सूचनाएँ) Encrypted और Secure होती हैं।

Different Types of SSL Certificate:

कुछ महत्वपूर्ण SSL Certificate के प्रकार निम्न हैं:-
  • Single domain SSL Certificate
  • Wildcard SSL Certificate
  • Multi-domain SSL Certificate
  • Extended Validation SSL Certificate
आप हमे जरूर बताये आपको SSL के बारे में दी गयी जानकारी कैसी लगी, कोई सुझाव हो तो जरूर कमेंट करें। SSL क्या होता है.? "Secure Sockets Layer in Hindi" इसे आप अपने Friends के साथ जरूर शेयर करें। 

December 24, 2017

What is Web Browser in Hindi [Web Browser Kya hai.?]

Web Browser Kya Hota hai, World Wide Web के लिए Window की तरह काम करता है। जब भी हम Internet पर Surfing की बात करते हैं तो पहला Internet Connection और दूसरा Requirement एक Browser होता है।

आज हम जानेंगे कि आख़िर Internet Browser क्या है और ये कैसे काम करता है।

What is Web Browser In Hindi:

Internet Browser आपके Mobile और आपके Desktop में Installed एक Software Program है। जिसकी Help से आप किसी Web Page को Internet पर आप आसनी से locate कर उसे Access कर सकते हैं।

Browser मुख्य रूप से Internet पर Available Websites को Display करने और Access करने के लिए उपयोग किया जाता है। Browser, Hypertext Transfer Protocol (HTTP) का Use कर किसी Website और webpage को किसी Human Language में translate करने का काम करते हैं।

Web Browser Kya Hai, What is browser and how it works in hindi

Web Browser हमें अन्य Protocol जैसे: Secure HTTP (HTTPS), File Transfer Protocol (FTP), Email और pdf files को Display करने में भी Help करता है। इसके अलावा, आप Browser का इस्तेमाल कर किसी Webpage पर Available video, audio और Flash content को भी देख सकते हैं।

In Short आप कह सकते है कि:-
"Browser हमें किसी भी Network पर उपलब्ध website और Information तक पहुंचने में Help करता है।"

History Of Web Browser in Hindi:

Sir Tim Berners Lee ने 1990 में सबसे पहले Web server और Web Browser को Develop किया था। इस Browser को World Wide Web नाम दिया गया और उसके बाद इसका नाम बदल कर Nexus कर दिया गया था। फिर साल 1993 में Mosaic नाम से एक Browser Launch हुआ जिसे Marc Andersen ने बनाया था।

इसके बाद 1995 में जब Microsoft ने अपना Operating System Launch किया तो उसके साथ Internet Explorer के नाम से Microsoft ने अपना Internet Browser भी Launch कर दिया।

साल 2002 तक Internet Browsing Market के 95% हिस्से पर Explorer का राज रहा और इसकी सबसे बड़ी वजह, इसका Microsoft Windows OS के साथ In build होना था।

इसके बाद Otello Corporation ने अपना Internet Browser, Opera को Launch किया। फिर 1998 में एक और Internet Browser Mozilla FireFox आया जो एक Open source आधारित web browser है।

Web Browser के field में सबसे बड़ा Change तब आया जब Search Engine Company, Google ने अपना Internet Web Browser Chrome September 2008 में Launch किया। इसके बाद पुरे Internet पर Google ने बहुत ही तेजी से 58%  Market पर कब्ज़ा कर लिया और Google Chrome लोगो के लिए पहली पसंद बन गया।

Web Browser Kaise Kam Karta Hai:

Web Browser कैसे काम करता है.? अगर हम कहे कि Internet और Web Browser एक दुसरे से जुड़े हुए हैं तो ये गलत नहीं होगा क्यूंकि बिना Internet के हम Browser का इस्तेमाल नहीं कर सकते और Browser बिना Internet के कुछ भी नहीं है।

जब हम किसी Browser में कुछ Type कर Search करते है। तब Browser उस Search Request को Internet पर Available सभी Special Computer जिसे Domain Name Server (DNS) के रूप में जाना जाता है, की Accessible Public file से Information को हमारे लिए खोज कर लाता हैं। ये सभी Request बहुत सारे Router और Switches के through पूरा होता है। जब आप किसी Web page को देखना चाहते हैं, तब आप अपने Browser में दिए गए Address Bar और Search bar का Use कर उस Page के लिए request करते है। Browser उसे आपके लिए खोज कर लाता हैं।


Web browser के इस्तेमाल से हम World Wide Web को आसानी से access कर पाते हैं। Web Pages को देखने के लिए Protocol का Use होता हैं। जैसे किसी भी Language के लिए एक विशेष तरीका का होना। Protocol भी एक प्रकार Set of Rules होता है, जैसे हमें English बोलने और लिखने के लिए कुछ Rules को जानना होता हैं। ठीक उसी तरह से Browser को भी हमारी बात समझने के लिए एक Specific Language की जरुरत होती है। इस Set of Rules को हम HTTP यानि Hyper Text Transfer Protocol कहते है।


HTTP Web server को ये बताता है कि किसी Web page के contents को किस format में Transmit करना है।  साथ ही की किसी users के द्वारा दिए गए commands के लिए web servers और web browsers दोनों को कैसे react करना है। HTTP, किसी भी Web Client और Web Server को एक दुसरे से जुड़ने में help करता है।

जब भी कोई User किसी भी browser के Address bar पर कोई भी URL Address को type करता है, तब browser उसकी उस Request को HTTP command के रूप में Web Server को भेजता है। इसके बाद browser उस web server के साथ जुड़ता है, और वहां से Request किये हुए Web page या Website के उस Content को निकाल कर User के Web Browser में सारी जानकारी Show करता है।

अगर आपको "What is Web Browser and How its Works in Hindi" इस जानकारी में कुछ ग़लत या इस Subject से जुडी कोई भी सवाल हैं, तो आप हमसे हमारे Comment box में पूछ सकते हैं।

July 30, 2017

What is COCOMO in Hindi, Software Engineering me [COCOMO Model Kya hai.?]

Software Engineering me COCOMO Model Kya Hai:


Barry Boehm ने वर्ष 1981 में COCOMO (Constructive Cost Estimation Model) Model को Introduce किया था। Bohem के अनुसार कि किसी भी Software Development Project को उसके Development के Complexity के आधार पर Organic, Semidetached और Embedded में से किसी एक में classified किया जा सकता है।

COCOMO Model in Hindi:

COCOMO Model का उपयोग किसी भी Software के Development में Cost Estimation के लिए किया जाता है जो Software के Cost को Evalute करता है। Boehm के अनुसार किसी भी Project के Development के लिए लगने वाला Cost उस Software के(बनने वाला) Characteristics के साथ साथ उसमे लगने वाले Development Team और Development environment के ऊपर भी निर्भर करता है, और ये सभी Factors किसी न किसी रूप में उसके Cost को effect करते है।

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COCOMO Model में किसी Project को Devlope करने के लिए उसमे लगने वाले समय(month) और Person की संख्या की जरूरत को estimate करने के लिए effort equation का प्रयोग किया जाता है। Effort estimation के unit के लिए PM(person-months) का use होता है। यहाँ पर PM किसी Project को बनाने में किसी एक Person द्वारा एक महीने (months) में उसके Workdone से है।



Boehm के अनुसार, किसी भी Software को Cost Estimation के आधार पर निम्न तीन Stages में बांटा जाता हैं, या बांटा जाना चाहिए।
  1. Basic COCOMO Model,
  2. Intermediate COCOMO Model, and
  3. Complete COCOMO Model
हम जल्द ही COCOMO Model के तीनो Stages को details में Discuss करेंगे..। 

January 3, 2017

Software Engineering Kya hai [What is Software Engineering in Hindi]

Software Engineering एक Systematic रूप है जिसके द्वारा किसी Electronic (Devices) Technology के लिए विशेष प्रकार के Application के  Design, Development, Implementation, Testing और Maintenance से हैं ।

"Software engineering" शब्द सर्वप्रथम 1968  में NATO के Software Engineering सम्मेलन में प्रयोग में लाया गया था जोकि उस समय के "Software crisis" को सुलझाने के लिए आयोजित किया गया था और तबसे अबतक ये Software engineering एक ऐसे व्यवसाय के रूप में विकसित हो चुका है जो High Quality के Software विकसित करने के लिए समर्पित है जो सस्ते, सरलता से रखरखाव करने के योग्य और तेज़ी से बनाये जा सकने में आसन हो।

Software Engineering क्या है.?


अन्य Engineering शाखाओं की तुलना में "Software Engineering" एक नया क्षेत्र है, इसलिए इस क्षेत्र में बहुत काम किया जाना अभी बाकी है और तो Software Engineering को लेकर बहुत वाद-विवाद है की वास्तव में ये क्या है और इस बात की भी की क्या ये Engineering के क्षेत्र में रखे जाने योग्य है भी या नहीं।

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Software Engineering के क्षेत्र में तीव्रता से वृद्धि हुई, इसे अब केवल Programming तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता हैं। Software Engineer Programming तथा Designing करके इन Software's तथा Application's का निर्माण करते है।

                                             "Software engineering" के स्थान पर Software Industries में "Software Development" शब्द का भी प्रयोग किया जाता है जो engineering शब्द को Software Development के लिए संकुचित मानते हैं।

In Short हम कह सकते है कि :
" Software Engineering का अर्थ एक ऐसी Engineering से है जिसमें Computer System तथा किसी अन्य Electronic Devices के लिए Software के निर्माण और उसके विकास पर शोध से किया जाता है।"

Software को  अलग-अलग आधार पर अलग-अलग तरीकों से जांचा जाता हैं। उदाहरण के लिए, कोई भी User जब भी किसी Software को Use करता है तो अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रदर्शित होते या Perform करते देखना चाहता हैं। ठीक उसी तरह, किसी भी Software के Design, Coding और रखरखाव में शामिल Developers, User को Software वितरित (Deliver ) करने से पहले Software की आंतरिक विशेषताओं और खामियों को देखकर Software का मूल्यांकन करते हैं।




Software के Characteristics:

Software Characteristics को छह प्रमुख घटकों में वर्गीकृत किया जाता है।

एक अच्छे Software के निम्नलिखित गुणधर्म होते है:-

01). Functionality:  किसी भी सॉफ्टवेयर के निष्पादन की डिग्री को अपने इच्छित उद्देश्य से संदर्भित करता है।

02). Reliability:  किसी दी गई स्थितियों के तहत वांछित कार्यक्षमता को प्रदान करने के लिए सॉफ्टवेयर की क्षमता का उल्लेख करता है।

03). Usability: इस बात को संदर्भित करता है कि सॉफ्टवेयर आसानी से कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

04). Efficiency: सबसे प्रभावी और कुशल तरीके से सिस्टम संसाधनों का उपयोग करने के लिए सॉफ्टवेयर की क्षमता को दर्शाता है।

05). Maintainability: किसी सॉफ्टवेर को आसानी से अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने, इसके प्रदर्शन को बेहतर बनाने, या Error को सुधारने के लिए उसके Software System में संशोधन किया जा सकता है।

06). Portability: Software developers आसानी से (या कम से कम) परिवर्तनों के बिना, एक Platform से दूसरे Platform में Software Transfer कर सकते हैं, दुसरे शब्दों में, यह सॉफ्टवेयर की क्षमता को अलग-अलग Hardware और Software Platforms पर आसानी से कार्य करने के लिए संदर्भित करता है, इसमें कोई भी बदलाव किए बिना या आंशिक।

उपरोक्त विशेषताओं के अलावा, Robustness, Platform independecy और Integrity भी महत्वपूर्ण हैं।
Robustness: जिसमें Software Invalid Data के साथ Deliver किए जाने के बावजूद कार्यशीलता रख सकता है, जबकि Integrity: वह है जिसके द्वारा किसी सॉफ्टवेयर या डेटा को अनधिकृत पहुंच से रोका जा सकता है।

February 24, 2016

Bus Topology क्या हैं ..?(What is Bus Topology Network)

Bus Topology में एक ही Cable का प्रयोग होता है और सभी Computer's को एक ही Cable से एक ही क्रम में जोड़ा जाता है।  Bus Topology, LAN का एक arrangement होता है जिसमे की every node एक main cable और link से connected होती है जिसको की बस कहा जाता है इसमें कोई भी Device दुसरे Device से Data प्राप्त करना चाहता है तो उसे देखना पड़ेगा की Network खाली है या नहीं Network खाली होने पर ही Data प्राप्त किया जा सकता है।

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Bus Topology में Cable के Start तथा End में एक विशेष प्रकार का Device लगा होता है जिसे टर्मिनेटर (Terminator) कहते है।  इसका कार्य Signals को Control करना होता है।

Bus Topology के लाभ (Advantages of Bus Topology) :


  • Bus Topology को Install करना आसान होता है। 
  • इसमें Star व Tree Topology की तुलना में कम Cable Use होता है। 

Bus Topology के नुकसान (Disadvantages of Bus Topology) :


  • किसी एक Computer की खराबी से Data Transfer रुक जाता है। 
  • बाद में किसी Computer को जोड़ना अपेक्षाकृत कठिन है। 
  • इस Topology में किसी Individual device issues को troubleshoot करना मुश्किल होता है। 
  • ये किसी बड़े Network के लिए Suitable नही होता हैं।