July 18, 2018

Prototype Model in Hindi, Prototype Model क्या है? Software Engineering में!

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Prototype Model in Hindi: किसी System के Input और Output से जुडी Requirements के बारे में पूरी जानकारी नहीं होने पर Actual Software के Development से पहले एक Prototype का निर्माण किया जाता है, फिर उस Prototype के आधार पर final product को Develop किया जाता है।

किसी Software के final development से पहले एक Prototype model को बनाया जाना जरुरी हो जाता हैं क्युँकि Developer को System के Requirements से जुडी जानकरी अच्छे से नहीं होती है। Prototyping Model, Waterfall Model की कमियों को दूर करने के लिए develop किया गया।

What is Prototype Model, हिंदी में?


Prototype Model, एक Systems Development Method (SDM) है जिसमें किसी Software के Prototypes का निर्माण किया जाता है। जिसे तब तक Modify किया जाता हैं, जब तक कि एक final Software develop नहीं हो जाता हो।

prototype model in hindi

Prototype Model, Developers और Users के बीच होने वाला एक Iterative Development Cycle है। किसी भी Prototype को User पहले अच्छी तरह से Evaluate कर, इसकी ताकत और कमजोरियों के बारे में Developer को बतलाता हैं कि इसमें क्या जोड़ा जाना चाहिए? और क्या हटाया जाना चाहिए?  यह तब तक चलता हैं, जब तक End users बनाए गए Prototype Model से Satisfied नही होता है। एक Prototype Model को दूसरे Prototype के साथ भी Use में लाया जा सकता है।

 इसे भी पढ़े:  ➧ What is Software Engineering? in Hindi



Phases in Prototype Model (Hindi):

Phase of Prototype model in hindi

किसी भी Prototype Model के लिए कई चरण होते हैं:-

01). Requirements Gathering:

Prototype Model के पहले phase में सभी जरुरी Requirements के बारे में जानकारी ली जाती है। किसी भी Prototype Model को बनाने की शुरुआत Requirement के Analysis और System के Requitment से होती है। System की सभी आवश्यकताओं को जानने के लिए User से पूरी Detail लिया जाता है।।

02). Quick Design:

जब Requirements को जाना जाता है, तब System के लिए एक Preliminary design को बनाया जाता है। यह Quick Design होता है और इसमें System के लिए जरुरी तत्वों को Include किया जाता हैं। Quick Design, System के लिए Prototype को develop करने में मदद करता है।

03). Build Prototype:

Prototype Model के इस Phase में Quick Design से मिली सभी जानकारी के आधार पर Initial Prototype को Develope किया जाता है। यह System के Requirement के लिए Working Model और User Interface देता है।

 इसे भी पढ़े:  ➧ Spiral Model के बारे में हिंदी में!


04). Customer Evaluation:

जब Prototype को बना लिया जाता है, तब इसे User को Presente किया जाता है। User से इस Prototype को Evalute कर क्या जोड़ा या हटाया जाएं इस बारे में feedback देता और लिया जाता है। User के द्वारा किए गए Evaluation का Use System को और भी बेहतर बनाने में किया जाता है और Prototype में किये जाने वाले सभी संभावित Changes और Suggestions पर काम किया जाता है।

05). Refine Requirement's:

जब Users Prototype Model को Evalute करता हैं, तो Suggestions के आधार पर Prototype में Improvement किया जाता है। अगर User Prototype से Satisfied नही होता है तो एक नये Prototype को Build किया जाता है और यह Process तब तक चलता रहता है जब तक कि User के बताए गए Requirements से नही मिलता।

जब सभी जरूरतों को पूरा कर लिया जाता हैं तब final Prototype के आधार पर Actual Software को Develope किया जाता हैं।

अंतिम प्रणाली का पूरी तरह से मूल्यांकन और परीक्षण किया जाता है। बड़े पैमाने पर विफलताओं को रोकने और Downtime को कम करने के लिए नियमित रखरखाव जारी रखा जाता है।
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