Waterfall Model in Software Engineering in Hindi - Waterfall Model kya hai

September 11, 2018

Waterfall Model in Software Engineering in Hindi - Waterfall Model kya hai

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Waterfall Model Kya hai Software Engineering me:

SDLC Waterfall Model को 1970 ईस्वी में Winston Royce द्वारा पेश किया जिसे समझना और उपयोग करना बहुत सरल है। Waterfall Model को Linear-Sequential life Cycle Model के रूप में भी जाना जाता है। Waterfall Model में, Development Process में कोई भी चरण केवल तभी शुरू होता है जब पिछला चरण पूरा होता है। इसका मतलब यह है कि एक Phase का Output दूसरे Phase के लिए Input की तरह कार्य करता है।

What is Waterfall Model in Hindi?

Waterfall Model सबसे शुरुआती SDLC approach है जिसका उपयोग Software Development के लिए किया गया था। Waterfall Model एक Sequential Model है। यानि एक Phase का Development तब तक शुरू नही हो सकता जब तक कि उसका पिछला Phase पूरा नही हो जाता है, यानि कि हम Waterfall Model में किसी भी Phases को Overlap नही कर सकते है।

What is Waterfall Model in Hindi

Waterfall Model में एक Phase ऊपर से निचे की ओर गिरते हैं, किसी जलप्रपात की तरह। इसी प्रकृति के कारण इसका नाम Waterfall Model दिया गया है। जिस तरह से एक बार जब पानी की कोई धारा पहाड़ से नीचे की ओर गिरने लगता है और यह पानी ऊपर की ओर वापस नही जा सकता है। ठीक इसी प्रकार waterfall model भी कार्य करता है, एक बार Development का एक phase पूरा हो जाता है तो हम अगले phase में चले जाते है और वापस पिछले phase में नही जा सकते है।

In Short, हम कह सकते है कि:
Waterfall Model में, एक चरण का विकास केवल तब शुरू होता है जब पिछला चरण पूरा हो जाता है। 

किसी बड़ी और Complex projects के लिए Waterfall Model अच्छा नहीं होता है क्योंकि उसमें Risk factor ज्यादा है। यह उन Projects के लिए भी Suitable नहीं है, जहाँ Requirements को अक्सर बदलाव किया जाता है।

छोटे Projects के लिए Waterfall Model अच्छी तरह से काम करता है और उचित परिणाम देता है। इस मॉडल में Final Product का delivery देर से होता है क्योंकि इसमें कोई Prototype नहीं होता है।

 इसे भी पढ़ें:  ➧ Prototype Model in Hindi - प्रोटोटाइप मॉडल क्या है.?

Phases in Waterfall Model (Hindi):

waterfall model

Waterfall Model में निम्नलिखित 5 phases होते है:-

01). Requirement Phase:

इसमें System की सभी Requirements को एक ही जगह पर एकत्रित कर उसके document तैयार किया जाता है। Requirements के Documents को सावधानी से Store किया जाता हैं क्योंकि इसी फेज पर अगले phase आधारित होते हैं।

02). Design Phase:

इस Phase पहले चरण से प्राप्त आवश्यक Specifications का अध्ययन किया जाता है, और System Design को तैयार किया जाता है। यह Hardware और System Requirements को समझने में मदद करता है और पुरे System Architecture के बारे में भी बतलाता है।

03). Implementation Phase:

यहाँ इस Phase में Design Phase से प्राप्त सभी Input के साथ काम किया जाता हैं, सभी Hardware, Software और Applications को Install किया जाता है। प्रत्येक इकाई को उसकी कार्यक्षमता के लिए विकसित और परीक्षण किया जाता है जिसे इकाई परीक्षण कहा जाता है।

04). Verification Phase:

इसमें हर तरह से Software की Testing की जाती है और Software के सभी Parts को verify किया जाता है। कई तरीकों से Software का Evalution किया जाता है। ऐसा इसलिए की Software में कोई defact रह जाता हैं और इसका अच्छे से Verification नही किया गया हो तो Software के fail होने का Risk बना रहता है।

05). Maintenance Phase:

जब System बनके तैयार हो जाता है और User इसका उपयोग करना शुरू कर देते है तब Application बिना किसी Downtime के साथ काम कर रहा हैं या नहीं...इसपर ध्यान देना, जरुरत होने पर नए function के साथ System को Update करना, Customer के Feedback पर ध्यान देना Maintenance में शामिल होता हैं।

SDLC Waterfall Model में Maintenance के तीन प्रकार होते है:-
  1. Corrective Maintenance: इसका उपयोग उन Misteks को ठीक करने के लिए किया जाता है जिन्हें उत्पाद विकास चरण के दौरान नहीं खोजा गया था।
  2. Perfective Maintenance: Customer के अनुरोध के आधार पर System की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  3. Adaptive Maintenance: एक नए वातावरण, जैसे कि नए कंप्यूटर प्लेटफ़ॉर्म पर या किसी नए ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ काम करना।

 इसे भी पढ़ें:  ➧  Spiral Model क्या हैं.? (SDLC Spiral Model - Software Engineering)

Advantages & Disadvantages of Waterfall Model, हिंदी में:

Waterfall Model के Advantages:

SDLC Waterfall Model के कुछ प्रमुख फायदे हैं:-
  • यह बहुत सरल और समझने में आसान है।
  • इसमें सभी चरणों को एक बार में Process किया जाता है।
  • Model के प्रत्येक चरण को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
  • प्रक्रिया, कार्य और परिणाम बहुत अच्छी तरह से Documented होते हैं।
 इसे भी पढ़ें:  ➧ Iterative Model क्या है?

Waterfall Model के Disadvantages:

नीचे SDLC Waterfall Model की कुछ प्रमुख कमियां इस प्रकार से हैं:-
  • किसी भी Phase में Overlap नहीं किया जा सकता हैं। 
  • किसी भी Changes को adopt करने में मुश्किल होती हैं। 
  • Devlopment Process के हर चरण(Phase) के लिए समय और लागत का अनुमान लगाना मुश्किल है।

आज के समय में अधिकांश परियोजनाएं Agile Model और Prototype Model के साथ की जा रही हैं, लेकिन  Waterfall Model आज भी छोटे Projects के लिए अच्छा है।
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