Spiral Model in Hindi, What is Spiral Model & Its Phases

August 22, 2018

Spiral Model in Hindi, What is Spiral Model & Its Phases

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Software Engineering me Spiral Model Kya Hai:

Spiral Model सबसे महत्वपूर्ण Software Development Life Cycle Model (SDLC) में से एक है, जो Risk Handling के लिए सहायता प्रदान करता है। Spiral Model का उपयोग बड़ी परियोजनाओं के लिए किया जाता है जिसमें लगातार Enhancements की ज़रूरत होती है।

Spiral Model हिंदी में:

Spiral Model को पहली बार Barry Boehm ने 1986 में पेश किया था। इस SDLC Model में सभी Activities Repeat होती रहती हैँ जब तक Actual Software Build नहीं हो जाता और इसी Iteration के Spiral यानि घुमावदार होने की वजह से इसे Spiral model कहते है।

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Spiral Model को Meta-Model भी कहा जाता है क्योंकि यह Waterfall model और Prototyping model दोनों का उपयोग करता है। Spiral Model का प्रयोग बड़े Projects के लिए किया जाता हैं क्यूँकि इनमें लगातार Risk Analysis की आवश्यकता होती है।

Spiral Model का प्रयोग छोटे Projects में नही किया जाता क्युँकि Spiral Model के कार्यान्वयन के लिए अनुभवी संसाधनों की आवश्यकता होती है क्योंकि Risk Analysis इस Model का बहुत अभिन्न अंग है और Risk Analysis के लिए Expertise की आवश्यकता होती है और परिणामस्वरूप यह Model महंगा हो जाता है।


Software Development में Spiral Model काफी लचीले होने के लिए जाना जाता है क्योंकि यह परियोजना के प्रत्येक चरण के लिए Objectives को परिभाषित करने, Risk को Analyze करने और Planning करने के लिए Help करता है।

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Spiral Model Phase's in Hindi:


Spiral Model में आम तौर पर चार चरणों को शामिल किया जाता है, जिसे Model के प्रत्येक दौर में बार-बार Follow किया जाता है, जब तक कि Software Product में कोई और आवश्यकता लागू न हो।

Spiral Model के 4 Phase निम्न है:-

01). Planning Phase:

Planning Phase में Software के Development में लगने वाले आवश्यक बजट, संसाधन, समय, आदि का अनुमान लगाने के लिए इन आवश्यकताओं का अध्ययन और विश्लेषण किया जाता है। इस phase में हम क्या Achieve कराना चाहते है या उसके goals क्या है? इन सब को discuss करते है।

02). Risk analysis Phase:

Spiral Model के इस Phase में Software Development में आने वाले सभी संभावित Risk को Identify किया जाता है और उनके Solution पर काम किया जाता हैं।

03). Engineering Phase:

Software Development की पूरी प्रक्रिया इसी Phase में आती है। इसी Phase में Software की Coding और Testing की जाती है।

04). Evaluation Phase:

जब Software बनके तैयार हो जाता है, तब उसे Customers Evaluate करते है औऱ User बनाए गए Software पर अपना feedback और approval देते है।

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Spiral Model का Use कब किया जाता हैं?

Spiral Methodology का Use तब किया जाता हैं जब:-
  • जब कोई बड़ी परियोजना हो क्यूँकि Requirements, Unclear और ज़्यादा Complicity वाली हो सकती हैं
  • Software में लगातार Risk और Costs Evaluation की आवश्यकता होती है।
  • Software में महत्वपूर्ण बदलाव (Significant Changes) की होती है।
  • जब Software में किसी भी समय परिवर्तन की आवश्यकता हो सकती हो। 

Spiral Model Use करने के लाभ (Spiral Model Advantages):

Spiral Model को Use करने के लाभ इस प्रकार हैं:
  • कोई भी Development तेज होती है। 
  • बड़े Projects/Software को रणनीतिक तरीके (Strategic way) में बनाया और संभाला जाता है
  • किसी भी Risk का Evaluation उचित और Development के सभी चरणों पर Control।
  • अधिक से अधिक सुविधाओं (features) को एक Systematic way से जोड़ा जाता है।
  • Software का उत्पादन जल्दी होता है, Users के feedback और किसी भी परिवर्तन को तेजी से Implemented किया जा सकता हैं।


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Spiral Model Use करने के नुकसान (Spiral Model Disadvantages):

Spiral Model को Use करने के नुकसान इस प्रकार हैं:
  • इस Model में Risk analysis Important phase है, इसलिए Expert की आवश्यकता होती है।
  • किसी भी तरह से छोटे Projects के लिए फायदेमंद नहीं और उनके लिए महंगा है।
  • Iteration (Spiral) लगातार किया जा सकता हैं यानि हर Phases को कई बार दोहराया जा सकता हैं।
  • Intermediate phases की वजह से, बहुत ज्यादा Documentation की जरुरत होती है।
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